Technical Analysis - 2 / टैक्निकल एनालिसिस - 2





Technical Analysis -2 टैक्निकल एनालिसिस - २


तो दोस्तों पिछले अध्याय में हमने टेक्निकल एनालिसिस को समझा। किन्तु वो पूरा नहीं था अब जो मै आपको बताउंगी वो सब जानना आप सबके लिए बेहद जरूरी है क्योंकि सम्पूर्ण ज्ञान ही आपको शेयर मार्किट का गुरु या कहूं तो एक सफल ट्रेडर बना सकता है तो चलिए शुरू करते हैं  टैक्निकल एनालिसिस


टेक्निकल एनालिसिस ( जिसको हमने कुछ जगह TA से दिखाया है ) की सब से खास बात यह होती है कि किसी भी तरीके के एसेटस क्लास में आप इसका उपयोग कर सकते है। शर्त सिर्फ एक है कि उस एसेटस क्लास का पुराना ऐतिहासिक डाटा उपलब्ध हो। ऐतिहासिक डाटा का मतलब है कि उस ऐसेट का ओपन, हाई, लो, क्लोज और वॉल्यूम का डाटा मौजूद हो। 


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इसको मैँ आपको एक उदाहरण से समझाने की कोशिश करती हूँ । अगर आपने एक बार कार चलाना सीख लिया तो आप किसी भी तरीके की कार चला सकते हैं। इसी तरह से अगर आपने एक बार TA को सीख लिया तो आप इसका इस्तेमाल शेयर ट्रेडिंग में कहीं भी कर सकते हैं जैसे कमोडिटी ट्रेडिंग, विदेशी मुद्रा ट्रेडिंग, फिक्स्ड इनकम प्रॉडक्ट, आदि कहीं भी कर सकते हैं।

Technical Analysis -2 टैक्निकल एनालिसिस - २

 

किसी भी अन्य दूसरे तरीके की तकनीक के मुकाबले TA का यह सबसे बड़ा फायदा होता है। उदाहरण के तौर पर फंडामेंटल एनालिसिस में आपको हर शेयर का घाटा / मुनाफा / बैलेंस शीट / कैश फ्लो आदि जैसी बहुत सी चीजों पर ध्यान देना पड़ता है जबकि कमोडिटी में इनमें से बहुत सारी चीजें ऐसी हैं जो कि काम नहीं आती। आपको नए तरीके का डाटा इस्तेमाल करना पड़ता है।


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अगर आप कमोडिटी जैसे कॉफी या मिर्च की फंडामेंटल एनालिसिस करते हैं, तो आपको मॉनसून, उपज या फिर उसकी पैदावार, मांग तथा आपूर्ति एवं माल कितना पहले से ही रखा है जैसी बहुत सारी  चीजों के बारे में जानकारी रखनी पड़ेगी । इसी प्रकार अगर धातु या मेटल के बारे में या कच्चा तेल आदि की फंडामेंटल एनालिसिस करना है, तो आपको अलग तरह का डाटा चाहिए होगा। लेकिन हर एसेट क्लास की टेक्निकल एनालिसिस एक ही तरीके से ही की जा सकती है।


TA  इस बात पर ध्यान नहीं देती कि कोई शेयर अंडर वैल्यूड है या फिर  ओवर वैल्यूड है। टेक्निकल एनालिसिस में सिर्फ एक चीज का महत्व है– और वह है शेयर का पुराना ट्रेडिंग डेटा और यह डेटा आगे आने वाले समय के बारे में बहुत महत्वपूर्ण जानकारी और संकेत दे सकता है बल्कि मै कहूं तो देता भी है


टेक्निकल एनालिसिस कुछ अपनी धारणायें होती है, जिनके बारे में जानना आप सबके लिए बेहद जरूरी है:-


1. आपको एक बात का विशेष ध्यान रखना है कि किसी भी शेयर से जुड़ी कोई भी सूचना / जानकारी उस शेयर की कीमत में शामिल हो जाती है। इसको एक उदाहरण से समझों तो कोई एक व्यक्ति या संस्था अगर किसी शेयर की चुपचाप बाजार से खरीदारी कर रहा है क्योंकि हो सकता है कि उसको पता हो या उसका अनुमान हो कि कंपनी का आनेवाला तिमाही नतीजा अच्छा हो सकता है और ये शेयर मुझे अच्छा लाभ दे सकता है।


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वह व्यक्ति भले ही ये छुपा कर कर रहा हो लेकिन शेयर की कीमतों में इसका असर दिखने लगता है यहाँ आप कुछ भी छुपा नहीं सकते चाहे वो महामारी का असर हो या चाहे पडोसी मुल्क से युद्ध की संभावना ही क्यों न हो । एक अच्छा टेक्निकल एनालिसिस्ट शेयर के चार्ट पर इसको पहचान लेता है और वह उस शेयर को खरीदने के लिए उपयुक्त मानकर खरीदता है । हम आपको वैसा ही बनाने की कोशिश करेंगे बस आप हमारे साथ बने रहें 


2. यह पहली अवधारणा से ही मिली हुई है। हमारे पिछले उदाहरण में ही अगर देखें तो एक अच्छा टेक्निकल एनालिसिस्ट यह नहीं जानना चाहेगा कि उस व्यक्ति ने यह शेयर क्यों खरीदा ? TA का पूरा ध्यान इस बात पर होता है कि छुपा के की गई खरीदारी से शेयर की कीमत पर क्या असर पड़ रहा है और आगे क्या पड़ने वाला है ?


3. TA के मुताबिक कीमत में हर बदलाव एक खास ट्रेंड या चलन को बताता है। उदाहरण के तौर पर- निफ़्टी का 6500 से बढ़कर 7800 तक पहुंचना ये सब ये सब एक ही दिन में नहीं हुआ। यह चलन 10 - 11 महीने पहले से ही शुरू हो गया था। इसी से जुड़ी हुई एक दूसरी सोच यह भी है कि जब एक तरफ की चाल शुरू होती है तो शेयर की कीमत भी उसी दिशा में बढ़ती जाती हैं, कभी उपर की तरफ जाती है तो कभी नीचे की तरफ जाती है ।


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4. TA के मुताबिक जैसा मैंने आपको पहले भी बताया था कि इतिहास अपने आपको दोहराता है वैसे ही कीमत का चलन अपने आप को दोहराता है। इसीलिए शेयर की कीमत एक ही तरीके से चलती हैं। उदाहरण के तौर पर ऊपर जा रहे बाजार में बाजार का हर खिलाड़ी किसी भी कीमत पर शेयर खरीदना चाहता है भले ही वह शेयर कितना भी महंगा हो। इसी तरीके से गिरते हुए बाजार में वह किसी भी कीमत पर बेचना चाहते हैं भले ही शेयर की कीमत अपनी वास्तविक कीमत से बहुत सस्ती हो। इंसान की इसी आदत की वजह से इतिहास अपने को दोहराता है।


शेयर बाजार सुबह 9:15 से 3:30 बजे तक खुलते हैं। और इस बीच  इनमें  लाखों ट्रेड होते हैं। हर शेयर में हर मिनट कोई ना कोई सौदा होता ही रहता  है। अब सवाल यह है कि क्या हमें हर सौदे पर नजर रखनी चाहिए ? या हम हर शेयर पर या होने वाले सौदे पर नज़र रख सकते हैं  


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अगर हम बाजार में open यानी खुलने की कीमत, High यानी सबसे ऊंची कीमत,  Low यानी सबसे नीची कीमत और close यानी अंतिम कीमत को देखें तो हमें बाजार का एक ठीक - ठाक सार मिल जाता है। क्लोज या बंद कीमत को अगले दिन के लिए संकेत के तौर पर भी  देखा जाता  हैं और इससे बाजार के मुण्ड का पता चलता है । इसीलिए OHLC में C यानी क्लोज (Close) सबसे महत्वपूर्ण होता है। TA में इन चारों कीमतों को देखा जाता है। इनको एक चार्ट पर डाल कर एनालिसिस की जाती है।


याद रहे की सफल होने के लिए जानकारी या ज्ञान की आवश्यकता होती है और ये ज्ञान कहीं से भी लिया जा सकता है मैंने भी ज्ञान लिया है बहुत लोगों से तब जा कर आज मै आप सबके सामने अपना अनुभव शेयर कर रही हूँ और वैसे भी ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती आप कभी भी और किसी भी ज्ञानी व्यक्ति से ले सकते हैं अगर आपको मेरी कोई बात समझ नहीं आती है या आपका कोई प्रश्न  है तो आप कमेंट करके पूछ सकते हैं  -- धन्यवाद् 


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3 टिप्पणियाँ

  1. OLHC के एनालिसिस कैसे होता है? क्या इसमें वॉल्यूम/डिलीवरी भी शामिल होता है?

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    1. Share jis bhaw par khulta hai use Open, candle jahaan tak niche jaati hai use low , jahaan tak upar jaati hai use High or jahaan par din ke aakhiri din share band hota hai wo cloase kahlata hai or isme sab shamil hota hai share ki value market ke har movement ko cover karta hai... aap mere blog me padh sakte hain...

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