Technical Analysis In Hindi Part - 3 | टैक्निकल एनालिसिस इन हिंदी भाग - ३

By: Nutan Srivastava

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स्टॉक मार्किट में Technical Analysis का बहुत अधिक महत्व होता है इसीलिए मैंने इस पर तीन अध्याय लिखे हैं अगर आप भी स्टॉक मार्किट में निवेश की सोच रहे हैं तो Technical Analysis In Hindi आपके बहुत काम आएगी याद रखे इससे बढ़िया रिटर्न आपको और कहीं भी नहीं मिलेगा बस आपको इसे अच्छे से समझने की आवश्यकता है आप मेरी पोस्ट अंत तक पढ़ें यहां मैंने आपको इसके बारे में विस्तार से बताया है।

What is technical analysis and how it works?

स्टॉक मार्किट में Technical Analysis एक बेहद महत्वपूर्ण किरदार निभाता है इसीलिए ये काफी लम्बा अध्याय है और मैंने इसको तीन भागों में बांटा है और इन तीनो भागों में मैंने टेक्निकल एनालिसिस को पूरी डिटेल में समझाने की कोशिश की है।


अगर आपको इसे पूरा अच्छे से समझना है तो नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके मेरे पहले के दोनों भागों को अवश्य पढ़े इसको पढ़ने के बाद आप स्टॉक मार्किट और Technical Analysis – A Beginner's Guide को अच्छे से समझ जायेंगे

तो चलिए शुरू करते हैं Technical Analysis In Hindi Part - 3

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1. Type Of Chart

नॉर्मली  इस्तेमाल  किए जाने वाले चार्ट जैसे कॉलम चार्ट, पाई चार्ट, आदि TA ( Technical Analysis With Candlestick Charts ) में काम नहीं आते हैं । इस में से केवल एक चार्ट टेक्निकल एनालिसिस में काम आता है और वह है – लाइन चार्ट। ऐसा इसलिए है कि नॉर्मली इस्तेमाल किए जाने वाले चार्ट में सिर्फ एक ही डाटा प्वाइंट दिखाया जाता हैं जबकि TA  में कम से कम 4 डाटा प्वाइंट को देखना आवश्यक होता है।

( 1 ). जापानी कैंडलस्टिक ( 2 ). लाइन चार्ट ( 3 ). बार चार्ट

कैंडलस्टिक चार्ट पर हम सबसे ज्यादा जानकारी प्राप्त करेंगे क्योंकि ये अधिक विश्वसनीय होती है , लेकिन उससे पहले ये समझ लेते हैं कि लाइन चार्ट / बार चार्ट का इस्तेमाल क्यों नहीं करते हैं ।

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(a).लाइन चार्ट

सबसे आसान चार्ट होता  है। लेकिन इसमें केवल एक ही  डाटा प्वाइंट को दिखाया जाता है और उसी पर यह चार्ट तैयार किया जाता है। TA में सिर्फ एक चीज के लिए ही लाइन चार्ट बनाया जाता है और वो है क्लोजिंग प्राइस । हर दिन के क्लोजिंग प्राइस के लिए एक चार्ट पर एक बिंदु बनाया जाता है और उसके बाद उन सारे बिंदुओं को एक लाइन से जोड़ कर लाइन चार्ट बनाया जाता है ।

Technical Analysis In Hindi Part - 3

टैक्निकल एनालिसिस इन हिंदी भाग - ३

लाइन चार्ट की सबसे बड़ी खासियत यही है लेकिन यही इसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी है। यह बहुत ही सरल होता है। कोई भी ट्रेडर इसको देख कर एक ट्रेंड का पता लगा सकता है। लाइन चार्ट सिर्फ एक ट्रेंड बता सकता है और कुछ नहीं।  कमजोरी यह है कि यह सिर्फ क्लोजिंग कीमत के आधार पर बनाया जाता है और दूसरे डाटा प्वाइंट जैसे OPEN , HIGH , CLOSE , LOW पर ध्यान नहीं देता है । इसलिए ट्रेडर लाइन चार्ट का इस्तेमाल कम ही करते।

(b). बार चार्ट

बार चार्ट में लाइन के मुकाबले कुछ ज्यादा डाटा होता है। जैसे OPEN , HIGH , CLOSE , LOW चारों को इसमें दिखा सकते हैं।

1. सेन्ट्रल लाइन - बार का सबसे ऊपर का हिस्सा सबसे ऊँची कीमत यानी High को दर्शाता है जबकि बार का नीचे का हिस्सा सबसे निचे की कीमत यानी लो Low को दर्शाता है।

2. बाँया मार्क - ये ओपन यानी खुलने के समय वाली कीमत को दिखता है।

3. दाहिना मार्क - ये बंद यानि की CLOSE कीमत को दिखाता है।

Candlestick Chart क्या है 

हम यहां सिर्फ कैंडल स्टिक के बारे में ही जानेंगे इसलिए टाइम बर्बाद न करते हुए सीधे कैंडल स्टिक को समझना शुरू करते हैं

सबसे पहले जापानी कैंडलस्टिक का इतिहास जान लेना अच्छा होगा। नाम से आपको पता ही चल गया होगा कि कैंडलस्टिक की उत्पत्ति जापान में हुई थी। इसका सबसे पहले इस्तेमाल 18वीं सदी में जापान में हुआ था वो एक चावल का व्यापारी था । वैसे तो जापान में कीमतों की एनालिसिस करने के लिए इसका इस्तेमाल बहुत पहले से हो रहा है।

यह माना जाता है कि 1980 में एक स्टीव निशन नाम के एक व्यक्ति  ने इसे पाया और फिर दुनिया को इसका उपयोग और इसके काम का तरीका बताया। इसीलिए इसकी कैंडल का नाम भी जापानी भाषा में ही हैं। 

कैंडलस्टिक की संरचना कैसे हुई थी :- 

कैंडलस्टिक में ओपन और क्लोज कीमतें एक चौकोर आयत यानी रेक्टैंगल (Rectangle) के तौर पर दिखाई जाती हैं। कैंडलेस्टिक चार्ट में बेयरिश कैंडल यानी मंदी की कैंडल ( जिसको हमने लाल रंग से दिखाया है ) और तेजी की कैंडल यानी बुलिश कैंडल ( जिसको हमने हरे रंग से दिखाया है ) दोनों होती हैं।

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बुलिश कैंडल नीले हरे या सफेद और बेयरिश कैंडल लाल या काले कैंडल के तौर पर दिखाई जाती हैं। वैसे तो आप इन रंगों को किसी भी समय बदल सकते हैं और अपने पसंद के रंग के अनुसार चुन सकते हैं । Technical Analysis In Hindi का सॉफ्टवेयर आपको रंग बदलने की सुविधा देता है। इस मॉड्यूल में हमने बुलिश ( तेजी ) के लिए हरे और बेयरिश  ( मंदी ) के लिए लाल रंग के कैंडल का इस्तेमाल किया हैं। 

सबसे पहले बुलिश कैंडल को देखेंगे । बार चार्ट की ही तरह कैंडल शेप में भी तीन हिस्से होते हैं।

1. बीच की यानि सेंट्रल बॉडी – मुख्य हिस्सा जो कि आयताकार यानी रेक्टैंगुलर होता है और ओपन और क्लोज कीमत को जोड़ता है।

2. अपर शैडो – हाई को CLOSE  कीमत से जोड़ता है।

3. लोअर शैडो– लो को ओपन कीमत से जोड़ता है।


अब इसको एक उदाहरण से समझिये । मान लीजिए कि कीमतें निम्न हैं: 

ओपन = 62, हाई = 70, लो = 58, क्लोज = 67

इसी तरह बेयरिश कैंडल भी तीन हिस्सों में बनता होता हैं। 

1. सेन्ट्रल बाडी  – आयताकार मुख्य बॉडी जो ओपन और क्लोज कीमत को जोड़ती है। हालांकि ओपनिंग ऊपर की तरफ और क्लोजिंग रेक्टैंगल के नीचे की तरफ होता है।

2. ऊपर का शैडो– HIGH प्वाइंट को OPEN से जोड़ता है।

3. नीचे का शैडो– ये  लो प्वाइंट को बंद कीमत से जोड़ता है।

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अब एक उदाहरण के साथ इसको समझये । मान लीजिए कीमतें निम्न हैं 

ओपन  = 456 , हाई  = 470 , लो = 420 , क्लोज = 435

कैंडलस्टिक को पढ़कर और सीखकर उससे पैटर्न समझना आपके लिए और आसान हो जाएगा। अगर आपको एक टाइम सीरीज पर कैंडल स्टिक प्लॉट करना हो तो वो ऐसा दिखेगा जैसे निचे चित्र में है । हरे रंग का कैडल बुलिश यानी तेजी का है और लाल रंग का कैंडल बेयरिश है। 




जरा ध्यान से देखिएगा , लंबे कैंडल स्टिक ज्यादा खरीदारी या बिकवाली को दिखाता हैं जबकि छोटे कैंडल कम ट्रेडिंग को दिखाता हैं। छोटे कैंडल में कीमत में उतार - चढ़ाव भी बेहद कम होता है। कुल मिलाकर कहें तो  कैंडलस्टिक बार चार्ट की तुलना में कहीं ज्यादा आसान है और इसे  समझना और ट्रेंड को पहचानना भी बेहद आसान है। कैंडलस्टिक के जरिए आप OCHL  ( ओपन क्लोज हाई और लो ) में संबंध को ज्यादा आसानी से समझ सकते हैं।

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समय अवधि : - उसको कहते हैं जिस समय के लिए आप चार्ट को देखना चाहते हैं। इसकी अवधि कुछ भी हो सकती है वो मासिक , साप्ताहिक , दिन का या इंट्रा डे के लिए ये चार्ट – 30 मिनट, 15 मिनट और 5 मिनट, 60 मिनट का भी हो सकता है ये आप पर निर्भर करता है



आँकड़े या डाटा आपको काम की जानकारी भी दे सकते हैं और फालतू की जानकारी भी दे सकते हैं। एक ट्रेडर के तौर पर आपको सही जानकारी को ढूंढ़ना होता है। उदाहरण के तौर पर एक लंबी अवधि के इन्वेस्टर को साप्ताहिक या मासिक चार्ट देखना चाहिए क्योंकि यही उसको उसके काम की जानकारी देगा

जबकि एक इंट्राडे ट्रेडर को डेली चार्ट या 15 मिनट के चार्ट को देखना चाहिए। दिन में बहुत सारे सौदे करने वाले ट्रेडर को 1 मिनट का चार्ट ही उसके काम की जानकारी देगा।

तो आप समझ ही गए होंगे कि आपको समय की अवधि का चुनाव अपनी जरूरत की जानकारी के हिसाब से करना चाहिए। इसको अच्छे से समझने से पहले आपको नीचे दिये गए लिंक पर क्लिक करके इन्हे भी जरूर पढ़ना चाहिए ये आपके बहुत काम आएगा। 

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अगर आपका कोई सवाल हो तो आप कमेंट सेक्शन में पूछ सकते हैं और अगर ये अध्याय आपको अच्छा लगा हो तो इसे अपने दोस्तों से भी शेयर करें। ... धन्यवाद्


FAQ


Qs. चार्ट कितने प्रकार के होते हैं?

Ans. नॉर्मली इस्तेमाल किये जाने वाले चार्ट तीन प्रकार के होते हैं 1- जापानी कैंडलस्टिक चार्ट, 2- लाइन चार्ट, 3- बार चार्ट

Qs. कौन सा चार्ट ट्रेडिंग के हिसाब से बढ़िया होता है?

Ans. जापानी कैंडलस्टिक चार्ट ट्रेडिंग के लिए बढ़िया माना जाता है क्योंकि इसमें Open - Low - High - Close चारो डाटा पॉइंट को दिखाया जाता है। 

Qs. कैंडलस्टिक की संरचना कहाँ हुई थी?

Ans. जैसा कि इसके नाम से ही जाहिर है जापानी कैंडलस्टिक इसका अविष्कार जापान में हुआ था तभी इसकी हर कैंडल का नाम आज भी जापानी भाषा में है। 

Qs. इंट्राडे ट्रेडर्स को किस टाइम फ्रेम का चार्ट देखना चाहिए?

Ans. इंट्राडे ट्रेडर को डेली चार्ट या 15 मिनट के चार्ट को देखना चाहिए। दिन में बहुत सारे सौदे करने वाले ट्रेडर को 1 मिनट का चार्ट ही उसके काम की जानकारी दे सकता है।



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Nutan Srivastava

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If you have any doubt pls. let me know or leave a comment ... इस ब्लॉग की सभी जानकारी Education purpose के लिए है, किसी निवेश से पहले अपने फाइनेंसियल सलाहकार से जरुर सलाह ले

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