Marubozu Candle: Marubozu Candlestick Pattern in Hindi





 
Marubuzu Candle Stick Pattern In Hindi


जैसे कि हम पहले भी बता चुके हैं कि TA में सबसे जरूरी अवधारणा यह है कि इतिहास अपने आप को दोहराता है। TA इस धारणा को बार-बार इस्तेमाल करता है। यह सबसे महत्वपूर्ण अवधारणा है। TA की इस अवधारणा को और गहराई से समझना भी जरूरी है मान लीजिए आज 10 जुलाई 2019 है और कुछ चीजें बाजार में हो रही है।


1.पहली  घटना– शेयर पिछले 4 दिनों से लगातार गिरते जा रहे हैं ।

2. दूसरी घटना – आज 10 जुलाई 2019 को ट्रेडिंग का पांचवा दिन है जहां शेयर गिर रहे हैं। 

3. तीसरी घटना –  शेयर की कीमत का दायरा भी पिछले दिनों की तुलना में बहुत ज्यादा छोटा है।


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इनको ध्यान में रखते हुए अब आप सोचिये कि अगले दिन यानी की  11  जुलाई 2019 को शेयरों की गिरावट थम जाती है और शेयर थोड़ी तेजी के साथ बाजार बंद भी हो जाते  हैं। तो पिछली तीन घटनाओं के परिणाम में छठवें दिन शेयर बाजार ऊपर की तरफ गया था ।


कुछ समय बीत जाता है और बाजार में फिर से 5 दिनों तक हमें ऐसी ही घटना दिखती हैं जैसी हमें  पहले दिखी थी । अब आप अगले दिन यानि छठवें दिन के लिए क्या उम्मीद करेंगे ? हमारी जो  अवधारणा थी कि "कि इतिहास अपने आप को दोहराता है।" हम अपनी  धारणा में एक चीज और जोड़ देते हैं, वो ये है कि जब पिछले कुछ दिनों की घटनाएं ऐसी थीं तो शायद अब की घटना भी ऐसी हो हो सकती है और ये काफी बार सही भी होता है 


यह एक धारणा के साथ - साथ टेक्निकल अनॅलिसिस भी है और ये कैसे काम करता है हम यही जानगे क्योंकि केवल इन्हीं धारणाओं के ऊपर ट्रेड नहीं किये जाते।


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कैंडलस्टिक पैटर्न:- 

कैंडलस्टिक पैटर्न का इस्तेमाल हम ट्रेडिंग पैटर्न को समझने के लिए करते  है। पैटर्न, यानी एक खास तरह की घटना जब एक खास तरीके के संकेत देती है तो उसे पैटर्न कहा जाता है । TA में पैटर्न के आधार पर ही अपना ट्रेड यानी सौदा तय किया जाता हैं। किसी भी पैटर्न में दो या दो से अधिक कैंडल एक खास तरीके से लगे होते हैं। लेकिन कभी-कभी एक कैंडलस्टिक से भी पैटर्न समझा जा सकता है। इसलिए कैंडलस्टिक पैटर्न को सिंगल कैंडलस्टिक पैटर्न और मल्टीपल कैंडलस्टिक पैटर्न में बांटा जा सकता है। 

सिंगल कैंडल स्टिक निम्न होते हैं हम इन्ही को एक - एक करके समझेंगे 

1. मारूबोज़ू :- 1. बुलिश  2. बेयरिश मारूबोज़ू 

2. पेपर अम्ब्रेला :- 1. हैमर     2. हैंगिंग मैन 

3. दोजी

4. स्पिनिंग टॉप

5. शूटिंग स्टार


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ये सब सिंगल कैंडल स्टिक पैटर्न थे इन सबके अलावा कुछ कैंडल पैटर्न ऐसे होते हैं जो एक से अधिक कैंडल के मिलने पर बनती हैं उन्हें हम मल्टीपल कैंडल स्टिक पैटर्न कहते हैं ये निम्न हैं


1. एन्गल्फिंग पैटर्न :- 1. बुलिश 2. बेयरिश  

2. हेरामी :- 1. बुलिश  2. बेयरिश हेरामी 

3. पियर्सिंग पैटर्न

4. डार्क क्लाउड

5. मार्निंग स्टार

6. इवनिंग स्टार


आप शायद सोच रहे होंगे की इन सबका मतलब क्या है तो जैसा की हमने आपको बताया था कि इसका आविष्कार जापान में हुआ तो जहिर है की इसका नाम भी जापानी भाषा में ही होगा , ये ( कैंडलस्टिक ) ट्रेड की रणनीति बनाने में काफी मदद गार साबित हो सकता है बल्कि मै कहूं तो होता भी है  हैं। हर एक पैटर्न में एक रिस्क की रणनीति भी होती है और साथ में ही, एन्ट्री और स्टॉप लॉस कीमत और एग्जिट के बारे में भी संकेत होते हैं। जिन्हे आपको पहचानना होता है जिसके बारे में मै आपको आगे बताउंगी 


हम पैटर्न के बारे में जानना शुरू करें उसके पहले कुछ और बातों को अपने दिमाग में रखना बेहद जरूरी है। हो सकता है कि यह धारणाएं अभी आपको पूरी तरीके से समझ ना आएं लेकिन जैसे - जैसे आप आगे बढ़ेंगे  इनके बारे में और विस्तार से समझ जायेंगे ।


1. मजबूती में खरीदें और कमजोरी में बेचें, 2. हर पैटर्न में बदलाव की गुंजाइश रखें,  3. किसी भी पैटर्न के पहले के ट्रेंड को देखें


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सिंगल कैंडल स्टिक पैटर्न


जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि यह एक कैंडलस्टिक से बनने वाला पैटर्न है। यह एक दिन के ट्रेडिंग सेशन के आधार पर बनता है। इस  पैटर्न के आधार पर किया जाने वाला सौदा काफी फायदे दे सकता है अगर आपने उस पैटर्न को ठीक से पहचाना है और सौदे को ठीक से किया है तो । आपको कैंडल की लंबाई को भी ठीक से देखना होगा ।


आपको याद ही होगा कि कैंडलस्टिक की लंबाई उस दिन के दायरे को बताती है, जैसा हमने पहले भी कहा था की जितना लंबा कैंडल होगा, उस दिन की खरीद-बिक्री उतनी ही ज्यादा होगी। अगर कैंडलस्टिक बहुत ही छोटी है तो उसका कारण ये  दिन उस शेयर में खरीद और बिक्री बहुत कम हुई है ।आप ये सारे पैटर्न खुद भी इन्वेस्टिंग डॉट कॉम पर या मनी कण्ट्रोल की साइट पर भी देख सकते हैं बाकी मै यहां आपको चित्र भी इसमें दिखा देती हूँ  



1. मारूबोज़ू :-


ये वह सिंगल कैंडलस्टिक पैटर्न है जिसके बारे में हम आगे जानने की शुरुआत करते हैं । चूँकि कैंडल की शुरुआत जापान से हुई थी इसलिए इसका ही नहीं बल्कि सारी कैंडल्स का नाम जापानी भाषा में ही हैं और जापानी भाषा में इसका का मतलब – गंजा होता है। ये दो प्रकार के होते हैं बुलिश / बेयरिश ।


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अब एक और उदाहरण के लिए चार्ट पर मारूबोज़ू वह अकेला पैटर्न है जो हमेशा नंबर 3 अवधारणा को पूरा नहीं करता । ये कैंडल आपको पूरे चार्ट में कहीं पर भी दिखाई पड़ सकता है बिना पिछले ट्रेंड की कोई परवाह किए बगैर। इसके बावजूद इसके आधार पर किए गए सौदे पर कोई अंतर नहीं पड़ता। ये वह कैंडल है जिसमें ऊपर और नीचे की तरफ कोई शैडो नहीं होते हैं  इसीलिए इसे मारबोज़ू ( गंजा ) कहते हैं। इसमें सिर्फ और सिर्फ रियल बॉडी ही होती है हालांकि यह नियम भी हमेशा सत्य नहीं है कभी-कभी इससे अलग भी होता है की बिलकुल हल्का - फुल्का शैडो हो तो भी हमें इसे मारबूज़ु मान लेना चाहिए ।



बुलिश मारूबोज़ू :- में अपर और लोअर शैडो का ना होने का मतलब यह होता है कि, LOW  बराबर है OPEN  के और HIGH बराबर है CLOSE के। ओपन = लो और क्लोज = हाई एक बुलिश मारूबोज़ू बताता है कि बाजार में बहुत ज्यादा खरीदारी हो रही है और खरीदार इसे हर कीमत पर खरीदना चाहते हैं और खरीद भी रहे हैं   




इसीलिए शेयर अपने HIGH प्वाइंट पर जाकर बंद हो जाता है। इससे फर्क नहीं पड़ता कि इसके पहले का ट्रेंड क्या था बुल या बेयर । इस तरह का एक्शन बताता है बाजार में मूड और माहौल बदल गया है और शेयर अब पूरी तरीके से तेजी में है यानी बुलिश है। यह अनुमान लगाया जा सकता है कि इस बदलाव की वजह से अब तेजी रह सकती है और यह अगले कुछ समय तक बना भी रह सकता है । इसीलिए ऐसे में आपको शेयर खरीदने के मौके को तलाशना चाहिए। बुलिश मारूबोज़ू में खरीद की कीमत वह होना चाहिए जो इस कैंडल की क्लोजिंग प्राइस है। इसका चित्र मैने नीचे दिखाया हुआ है
 

यहां आप ध्यान दें एक ही चार्ट में आपको तीन जगह मारुबूज़ु कैंडल दिखेगी और शेयर का प्राइस भी लगातार ऊपर जाता रहा है 


मारूबोज़ू के कैंडल को अगर आप ध्यान से देखेंगे तो आपको दिखेगा की इसमें ऊपर या नीचे का कोई शैडो यानि की रेखा दिखाई नहीं पड़ रही है । इस कैंडल का O-H-L-C है ओपन = 971.7 , हाई = 1030.1 , लो =  970, क्लोज = 1028.3 


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कृपया यहां ध्यान दीजिएगा कि किताब की परिभाषा के अनुसार ओपन = लो तथा हाई = क्लोज । लेकिन यहां पर इस उदाहरण में हक़ीक़त थोड़ा सा भिन्न है । हालांकि अगर आप इसे प्रतिशत में देखेंते हैं तो यह बहुत बड़ा बदलाव नहीं है प्रतिशत में सिर्फ 0.17% का ही अंतर है। यहीं पर यह दूसरा नियम लागू हो जाता है कि थोड़े से बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए और जाँच करिए। इस मारूबोज़ू से आपको पता चल रहा होगा कि बाजार में अब तेजी आ गई है और अब यह शेयर खरीदने का अब सही समय है। इस सौदे के लिए सही कीमत यह होंगी:


खरीद की कीमत = 1028 के आस - पास और स्टॉप लॉस = 968 का 


अब जब हमने मारूबोज़ू देख कर शेयर खरीदने का मन बना लिया तो शेयर खरीदने का सही समय इस पर निर्भर करेगा कि आपकी रिस्क लेने की क्षमता क्या है, यहां बाजार में 2 तरीके के ट्रेडर्स होते हैं- एक रिस्क लेने वाला एक रिस्क से बचने वाला।


1. रिस्क लेने वाला ट्रेडर शेयर को उसी दिन खरीदेगा जिस दिन उसे मारूबोज़ू बनता हुआ दिख जायेगा हालांकि उसे निश्चिंत होना होगा कि मारूबोज़ू वास्तव में बनेगा ही । वैसे यह जांचना भी काफी आसान है, जैसा की आप जानते ही हैं की शेयर बाजार 3:30 बजे बंद होत जाते हैं तो उसे बाजार बंद होने से 8 से 10 मिनट पहले यानी 3:20 के आस - पास  पर यह देखना है कि शेयर की मौजूदा कीमत यानी CMP उस दिन के सबसे ऊँची कीमत के और बाजार खुलने के समय की कीमत बराबर है सबसे नीची कीमत के।


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अगर यह दोनों चीजें पूरी हो जाती है तो आपको पता चल जाएगा उस दिन बाजार में मारूबोज़ू बना है दूसरा तरीका ये भी है की आप दिन का कैंडल देखें उसमे भी आपको पता चल जायेगा और आप शेयर को खरीद सकते हैं। आपकी खरीद मार्किट की क्लोजिंग प्राइस के आस - पास होनी चाहिए। रिस्क लेने वाला ट्रेडर भी शेयर तेजी यानी की हरे कैंडल वाले दिन खरीद रहा है और वह नियम नंबर 1 का पालन कर रहा है कि मजबूती में buy करो और कमजोरी में सेल करो 


2. रिस्क से बचने वाला ट्रेडर शेयर तब खरीदेगा जब उसे यह तय हो जाएगा कि मारूबोज़ू पिछले दिन बन चुका है लेकिन शेयर खरीदने के पहले उसे यह निश्चित करना होगा कि जब वो खरीद रहा है उस दिन भी तेजी बनी हुई है क्योंकि तभी वह नियम नंबर 1 का पालन कर रहा होगा।  इसका मतलब है कि उसे शेयर उस समय खरीदना होगा जब बाजार बंद होने वाला हो।

इस तरीके के ट्रेड के लिए एक मुश्किल ये होती है कि खरीद की कीमत हमेशा खरीद की कीमत जो सुझाई गयी होती है उससे ये थोड़ी ऊंची होती है इसलिए स्टॉप लॉस भी बहुत नीचा होता है चूँकि ये ट्रेडर रिस्क नहीं लेना चाहता इसलिए वह पूरी तरह निश्चिन्त हो जाने पर ही यह सौदा करता है।यहां चार्ट पर एक नजर डालते हैं जहां पर रिस्क लेने वाला और इससे बचने वाला ट्रेडर दोनों को फायदा होता है



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बुलिश मारूबोज़ू में स्टॉपलॉस :-


अगर बाजार में आपकी खरीदारी के बाद शेयर ने दिशा बदल दी और सौदा उल्टा पड़ गया तो ऐसे में आप क्या करेंगे ? मैंने पहले ही कहा है कि कैंडलस्टिक पैटर्न में रिस्क से बचने का अपना खुद का मेकैनिज्म यानी क्रियाविधि होती है। बुलिश मारूबोज़ू में शेयर का लो उसके स्टॉपलॉस की तरह काम करेगा । अगर आप ने किसी शेयर को खरीदा और मार्केट दूसरी तरफ चला गया तो आपको अपने शेयर से तब निकल जाना चाहिए ( जब शेयर अपने लो को तोड़ देता है तो ) इसका भी चित्र मै आपको नीचे दिखा रही हूँ 



लेकिन मारूबोज़ू पैटर्न यहाँ नहीं बनता और सौदे में घाटा हो जाता है। इस सौदे का स्टॉपलॉस होगा मारूबोज़ू का लो यानी सबसे नीची कीमत 959.85. । वैसे सौदे यानी ट्रेड में कभी-कभी घाटा उठाना शेयर ट्रेडिंग का एक हिस्सा है और बहुत ही ज्यादा अनुभवी खिलाड़ी भी कभी-कभी घाटा उठाते हैं। 


लेकिन कैंडलस्टिक के हिसाब से सौदा करने का बड़ा फायदा यह होता है कि नुकसान बहुत लंबा नहीं चलता, यह बहुत साफ होता है कि कब आप को अपने सौदे से बाहर आना है । क्योंकि शेयर लगातार नीचे की ओर जा रहा है। हालांकि ऐसा भी हो सकता है कि आपके स्टॉपलॉस के बाद यानी आपके शेयर से निकल जाने के बाद शेयर अपनी दिशा बदल दे और फिर से ऊपर की तरफ जाने लगे।

लेकिन आप इस से बच नहीं सकते क्योंकि ऐसा होना भी बाजार में एक आम बात है। एक खास बात ये है कि बाजार में कुछ भी हो आपको अपने नियमों को नहीं भूलना है उसका पालन करना ही सबसे जरुरी है ।


बेयरिश मारूबोज़ू :-


बेयरिश मारूबोज़ू का मतलब है कि बाजार में काफी मंदी आ रही है। यहां पर ओपन, हाई के बराबर होता है और क्लोज, लो के बराबर।  बेयरिश मारूबोज़ू यह बताता है कि बाजार के लोगों में बेचने का मूड इतना ज्यादा है कि बाजार के भागीदार किसी भी कीमत पर बेच कर निकल जाना चाहते हैं। जिसकी वजह से शेयर अपने सबसे निचली कीमत के आस पास जाकर बंद होता है।


ऐसे में कोई फर्क नहीं पड़ता कि इसके पहले का ट्रेंड क्या था। बेयरिश मारूबोज़ू यह बताता है कि मूड बदल गया है और बाजार मंदी में है। यहां भी उम्मीद की जाती है कि मूड में यह बदलाव अगले कुछ दिन तक चलता रहेगा और शेयर लगातार मंदी में रहेगा। ऐसे में शेयर को शॉर्ट करने के मौके तलाशने चाहिए और शॉर्ट में बेचने वाली कीमत उस दिन के बंद कीमत के आस पास होनी चाहिए।


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इस कैंडल में भी अपर और लोअर शैडो नहीं होते हैं। जैसा कि हम पहले ही बता चुके हैं कि OHLC के आंकड़ों में थोड़ा-बहुत ऊपर-नीचे होना कोई बहुत बड़ी बात नहीं है, बस उसका दायरा कम होना चाहिए यानी बदलाव ज्यादा नहीं होना चाहिए। इस बार इस मारूबोज़ू के आधार पर शेयर का सौदा बेचने का होगा और बेचने की कीमत होगी 341 रुपये। एवं स्टॉपलॉस उस दिन के कैंडल की सबसे ऊंची कीमत यानी की 357 रुपये होगी । 


हालांकि हमने अभी तक टारगेट प्राइस क्या होना चाहिए ये नहीं सीखा है लेकिन हम आगे  इस पर चर्चा करेंगे पर यह याद रखिए कि आपको जब तक टारगेट हिट न हो जाए या स्टॉपलॉस आपको सौदे से बाहर नहीं निकलना है । अगर आपने इन दोनों में से किसी भी एक के हिट होने के पहले कुछ किया तो हो सकता है कि आपका सौदा उल्टा पड़ जाए। इसलिए यह अनुशासन रखना बहुत जरूरी है।


सौदे आपके रिस्क लेने की क्षमता के आधार पर किए जाएंगे। रिस्क लेने वाला ट्रेडर सौदा उसी दिन शुरू कर सकता है अगर उसे कैंडल में बेयरिश मारूबोज़ू दिख रहा है। इसके लिए उसे शाम 3:20 के आसपास यह निश्चित करना होगा कि ओपन = हाई और उस समय की कीमत (Current Market Price- CMP) उस दिन के बाजार की सबसे नीची कीमत है।


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अगर ऐसा दिख रहा है तो इसका मतलब है कि बेयरिश मारूबोज़ू निश्चित है और वह अपने शॉर्ट पोजीशन ले सकता है। अगर ट्रेडर रिस्क से बचना चाहता है तो वो अगले दिन की क्लोजिंग तक इंतजार करेगा। वह अपनी शॉर्ट पोजीशन अगले दिन 3:20 के आसपास बनाएगा जब उसे यह पता चल जाएगा कि यह दिन भी एक रेड कैंडल का दिन है इस तरह से पहले नियम का पालन भी कर पायेगा कि मजबूती में खरीदो और कमजोरी हो तो बेचो।इस सौदे में रिस्क लेने वाले और इससे बचने वाले दोनों तरीके के ट्रेडर को फायदा होगा।


अब एक और चार्ट देखते हैं जहां बेयरिश मारूबोज़ू, रिस्क लेने वाले और इससे बचने वाले दोनों तरीके के ट्रेडर को फायदा होगा एक बात और याद रखना है कि यह कम टाइम के लिए किये जाने वाले यानि की शॉर्ट टर्म के ट्रेड होते हैं और यहां मुनाफा लेकर के जल्दी से जल्दी निकल लेना चाहिए।



ट्रेड ट्रैप :-


इस अध्याय के शुरू में हमने कैंडल की लंबाई की बात की थी। अगर कैंडल बहुत छोटा हो यानी उसकी रेंज 1% से नीचे है या फिर कैंडल बहुत बड़ा है और उसकी रेंज 10% से ज्यादा है ऐसे में सौदा नहीं करना चाहिए। कैंडल छोटा होने का मतलब होता है कि बहुत कम सौदे होना और ऐसे में ट्रेड की दिशा को समझ पाना बेहद मुश्किल होता है ऐसे ही जब कैंडल लंबा हो तो इसका मतलब है कि बहुत ज्यादा सौदे होना ऐसे में स्टॉपलॉस लगा पाना बड़ा मुश्किल काम होता है।


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इस माहौल में आप का स्टॉपलॉस बड़ा होगा और अगर सौदा उल्टा पड़ गया तो आप को काफी नुकसान हो सकता है। इसीलिए बड़े और छोटे कैंडल के समय सौदे ना करना ही बेहतर होता है।


अब हम अपने अगले अध्याय में कैंडल स्टिक के बारे में जानेंगे तब तक आप मेरे लिखे सारे लेख का रिविजन कर लें अगर आपका कोई प्रश्न हो तो कमेंट सेक्शन में पूछ सकते हैं मै आपके हर प्रश्न का जवाब अवश्य दूंगी।

धन्यवाद्


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